आस्तिकताऔर नास्तिकता
नास्तिकता जो जगत् की सृष्टि
करने वाले, इसका
संचालन और नियंत्रण करनेवाले किसी भी ईश्वर के अस्तित्व को सर्वमान्य प्रमाण के न
होने के आधार पर स्वीकार नहीं करता।[1] (नास्ति = न + अस्ति
= नहीं है, अर्थात
ईश्वर नहीं है।) नास्तिक लोग ईश्वर (भगवान) के अस्तित्व का स्पष्ट प्रमाण न होने कारण
झूठ करार देते हैं। अधिकांश नास्तिक किसी भी देवी देवता, परालौकिक शक्ति, धर्म और आत्मा को
नहीं मानते। हिन्दू
दर्शन में नास्तिक शब्द
उनके लिये भी प्रयुक्त होता है जो वेदों को मान्यता नहीं देते। नास्तिक मानने के
स्थान पर जानने पर विश्वास करते हैं। वहीं आस्तिक किसी न किसी ईश्वर की धारणा को
अपने संप्रदाय, जाति, कुल या मत के अनुसार
बिना किसी प्रमाणिकता के स्वीकार करता है। नास्तिकता इसे अंधविश्वास कहती है क्योंकि
किसी भी दो धर्मों और मतों के ईश्वर की मान्यता एक नहीं होती है। नास्तिकता
रूढ़िवादी धारणाओं के आधार नहीं बल्कि वास्तविकता और प्रमाण के आधार पर ही ईश्वर
को स्वीकार करने का दर्शन है। नास्तिकता के लिए ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करने के
लिए अभी तक के सभी तर्क और प्रमाण अपर्याप्त है।मानवानुरूप व्यक्तित्वयुक्त
ईश्वर (परसनल गाड)। इस संसार का उत्पादक (स्रष्टा), संचालक और नियामक, मनुष्य के समान
शरीरधारी, मनोवृत्तियों से
युक्त परमशक्तिशाली परमात्मा है। वह किसी एक स्थान (धाम) पर रहता है और वहीं से सब
संसार की देखभाल करता है, लोगों
को पाप पुण्य का फल देता है एवं भक्ति और प्रार्थना करने पर लोगों के दु:ख और
विपत्ति में सहायता करता है। अपने धाम से वह इस संसार में सच्चा धार्मिक मार्ग
सिखाने के लिए अपने बेटे पैगंबरों, ऋषिमुनियों को समय-समय पर भेजता है और कभी
स्वयं ही किसी न किसी रूप में अवतार लेता है। दुष्टों का दमन और सज्जनों का उद्धार
करता है। इस मत को पाश्चात्य दर्शन में थीज्म कहते हैं।कुछ दार्शनिक यह
मानते हैं कि ईश्वर तो सृष्टिकर्ता मात्र है और उसने सृष्टि रच दी है कि वह स्वयं
अपने नियमों से चल रही है। उसको अब इससे कोइ मतलब नहीं। जैसे घड़ी बनानेवाले को
अपनी बनाई हुई घड़ी से, बनने के
पश्चात्, कोई संबंध नहीं
रहता। वह चलती रहती है। इस मत की कुछ झलक वैष्णवों की इस कल्पना में मिलती है कि
भगवान विष्णु क्षीरसागर में सोते रहते हैं और शैवों की इस कल्पना में कि भगवान
शंकर कैलास पर्वत पर समाधि लगाए बैठे रहते हैं और संसार का कार्य चलता रहता है।

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